मित्रता तपन में फुहार सी
ठंडक का अहसास देती है।
मित्रता बिन मांगे मोती
आंचल में हो तो
खुशियों की सौगात देती है।
मित्रता व्यक्ति की निज छांव
दुख-सुख में साथ रहती है।
बहुत कम होते हैं सुदामा
जिनके मित्र स्वयं भगवान होते हैं।
यदि हो सच्चे मित्र साथ
तो जीवन के हर क्षण
मित्रता-दिवस समान होते हैं।
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यूं तो कहने को परिवार, रिश्तेदार साथ हैं, जिन्दगी बिताने को,
जवाब देंहटाएंफ़िर भी एक दोस्त चाहिये, दिल की कहने- सुनने, बतियाने को!!
आपने बहुत सही कहा संजय जी . सम्बन्धों में बड़े-छोटे के साथ जिमेदारियों का दायित्व बँधा होने से बराबरी में सुख-दुख बाँटने का भाव नही आ पाता .
हटाएंबहुत खुबसूरत दोस्ती के एहसासों वयक्त करती है आपकी रचना
जवाब देंहटाएंपुन: रचना सराहना हेतु हृदयतल से आभार संजय जी .
हटाएंसच कहा है ... मित्र न हों तो जीवन नीरस हो जाता है ... सच्चा साथी होता है मित्र ...
जवाब देंहटाएंरचना सराहना के लिए तहेदिल से शुक्रिया दिगम्बर जी.
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